Rasaynik abhi karan evn samikaran class 10 notes।रासायनिक अभिक्रिया एवं समीकरण क्लास 10th notes

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Rasaynik abhi karan evn samikaran class 10 notes

रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
(Chemical Reactions and Equations)

➡️ रासायनिक समीकरण किसी रासायनिक अभिक्रिया को दर्शाता है।

➡️ किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है न ही विनाश।

➡️रासायनिक समीकरण को सन्तुलित करने की विधि को हिट एण्ड ट्रायल विधि कहते हैं।

➡️रासायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारक परमाणुओं के आपसी बंधन
के टूटने और नए बंधन बनने से नए पदार्थों का निर्माण होता है।

➡️ ऐसी अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं।

➡️साग-सब्जियों का विघटित होकर कंपोस्ट बनना भी ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
का एक उदाहरण है।

➡️जिस अभिक्रिया में एकल अभिकर्मक टूट कर छोटे-छोटे उत्पाद प्रदान करता है, उसे वियोजन अभिक्रिया कहते हैं।

➡️जिन अभिक्रियाओं में ऊष्मा अवशोषित होती है उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं।

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रासायनिक अभिक्रिया एवं समीकरण क्लास 10th notes

➡️द्वि-विस्थापन अभिक्रिया में जब अवक्षेप का बनता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।

➡️किसी अभिक्रिया में पदार्थ का उपचयन तब होता है जब उनमें O2 की वृद्धि या H, का ह्रास होता है।

➡️पदार्थ का अपचयन तब होता है जब उसमें O2 का ह्रास या H27 कीवृद्धि होती है।

➡️जब कोई धातु अपने आस-पास अम्ल, नमी आदि के सम्पर्क में आती है तब वह संक्षारित होती है और उस क्रिया को संक्षारण कहते हैं।

अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases and Salts)

➡️अम्ल और क्षारक की जाँच लिटमस, हल्दी, मेथिल ऑरेंज और फीनॉलफ्थेलिन नामक सूचकों से की जा सकती है।

➡️ कुछ धातुएँ तनु अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस को विस्थापित करती है।

➡️ चूना पत्थर, खड़िया और संगमरमर कैल्सियम कार्बोनेट के विविध रूप हैं।

➡️धात्विक ऑक्साइड को क्षारकीय ऑक्साइड कहते हैं।

➡️जिंक हाइड्रॉक्साइड एक क्षारक है।
अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं।

➡️जल की उपस्थिति में HCI में हाइड्रोजन आयन मुक्त होते हैं।

➡️जल की अनुपस्थिति में HCI अणुओं से H+ आयन पृथक् नहीं हो सकते।

➡️ क्षारक जल में हाइड्रॉक्साइड (OH) आयन उत्पन्न करते हैं।

➡️जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं।

➡️ सभी अम्ल H* (aq) तथा सभी क्षार OH (aq) उत्पन्न करते हैं।

➡️ pH में ‘p’ सूचक है—पुसान्स (Pursance) का। यह एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ ‘शक्ति’ है।

➡️pH स्केल से शून्य (अधिक अम्लता) से 14 (अधिक क्षारीय) तक pH को ज्ञात कर सकते हैं।

➡️अधिक संख्या में H+ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं और कम H+ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलाते हैं।

➡️हमारा शरीर 7.0 से 7.8 परास के बीच कार्य करता है।
मुँह में pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय आरम्भ हो जाता है।

➡️बुझे हुए चूने और क्लोरीन की क्रिया से विरंजक
बनता है।

➡️बेकिंग सोडा (NaHCO,), सोडियम कार्बोनेट के जलीय विलयन में CO2 प्रवाहित करने से बनता है।

➡️धोने का सोडा (Na,CO,·10H2O) – अमोनिया सोडा विधि से तैयार किया जाता है। यह काँच, साबुन, कागज आदि उद्योगों में प्रयुक्त किया जाता है। इससे जल की स्थाई कठोरता दूर की जाती है।

➡️नीला थोथा, जलीय कॉपर सल्फेट का सूत्र CuSO4. SHO है तथा जिप्सम का सूत्र CaSO4.2H20 है।

➡️प्लास्टर ऑफ पेरिस, कैल्सियम सल्फेट अर्धहाइड्रेट (CaSOur 2 H50 ) को 273°K तक जिप्सम को गर्म करके बनाया जाता है।

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धातु और अधात (Metals and Non-Metals)

➡️लोहे का निष्कर्षण हेमेटाइट अयस्क से किया जाता है।

➡️दो या दो से अधिक धातुओं के समांगी मिश्रण से मिश्रधातुएँ तैयार की जाती हैं।

➡️गंधक के अपररूप है—रॉम्बिक तथा मोनोक्लीनिक सम्बे समय तक आर्द्र वायु में रखने पर लोहे पर भूरे रंग की परत चढ़ जाती है, जिसे जंग कहते हैं।

➡️तत्त्वों को धातुओं, अधातुओं एवं उपधातुओं में बाँटा गया है।

➡️ सभी तत्त्वों में अधातुओं की संख्या केवल 22 है।

➡️कमरा के ताप पर पारा के अतिरिक्त अन्य सभी धातुएँ ठोस हैं।

➡️आवर्त सारणी में धातुओं को बायीं तरफ तथा मध्य में स्थान दिया गया है जबकि अधातुओं को दायीं तरफ रखा गया है। धातु, इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन बनाते हैं।

➡️ सभी धातुएँ समान रूप से सक्रिय नहीं होती। इनकी सक्रियता ऑक्सीजन, जल और अम्लों से अभिक्रिया के आधार पर जानी जाती है। भू-पर्पटी में ऐल्युमिनियम धातु सबसे अधिक मात्रा में पाई जाती है।

➡️सोडियम और पोटाशियम को किरोसीन के तेल में डुबोकर रखा जाता है। एनोडीकरण, ऐल्युमिनियम पर मोटी ऑक्साइड परत बनने की अभिक्रिया को धनाग्रीकरण कहते हैं।

कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds)

➡️कार्बन की परमाणविक संख्या 6 है। इसके सबसे बाहरी कक्षा में चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः ‘C’ की 4 सह-संयोजकता है।

➡️ मिथेन कार्बन का एक यौगिक है। यह बायोगैस एवं कंप्रैस्ड नेचुरल गैस (CNG) का प्रमुख घटक है। यह कार्बन के सरलतम यौगिकों में से एक है।

➡️फुलेरीन कार्बन का रवादार अपरूप है जिसे C-60 के नाम से जाना जाता है।
➡️कार्बन के श्रृंखलन गुण के कारण कार्बन यौगिकों की संख्या बहुत अधिक है।

➡️ समान फॉर्मूला लेकिन विभिन्न संरचनाओं वाले यौगिक संरचनात्मक समावयवी (Isomers) कहलाते हैं।

➡️संतृप्त हाइड्रोकार्बन ‘एल्केन’ कहलाते हैं।

➡️ऐसे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जिनमें एक या अधिक द्वि-सहसंयोजक बंध होते हैं उन्हें एल्कीन कहते हैं।

➡️एक या अधिक त्रि-सहसंयोजक बंध वाले ‘एल्काइन’ कहलाते हैं।

➡️अल्कोहल, अल्डेहाइड, कीटोन, कार्बोक्सीलिक अम्ल आदि प्रकार्यक समूह हैं।

➡️पूर्ण ऑक्सीकरण से अल्कोहल को कार्बोक्सीलिक अम्ल में बदला जा सकता है।

➡️इथेनॉल कमरे के तापमान पर द्रव्य होता है। सामान्य रूप में इथेनॉल को ग्रैन अल्कोहल कहा जाता है।

➡️साबुन के अणु सोडियम और पोटाशियम लवण होते हैं जो लम्बो शृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल से बनते हैं।

➡️कठोर जल में मौजूद कैल्सियम, मैग्नीशियम लवणों से क्रिया कर साबुन, स्कम (Scum) बनाता है।

तत्त्वों का वर्गीकरण (Classification of Elements)

➡️सर्वप्रथम 1817 ई० में जर्मन रसायनज्ञ, वुल्फगांग डॉबेराइनर ने तत्त्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आधार पर वर्गीकृत करने का प्रयास किया।

➡️डाल्टन ने सन् 1803 में परमाणु द्रव्यमानों के आधार पर तत्त्वों का वर्गीकरण किया था।

➡️न्यूलैण्ड ने सन् 1864 ई. में अष्टक नियम के आधार पर 40 परमाणु द्रव्यमान वाले कैल्सियम तक तत्त्वों का वर्गीकरण किया था।

➡️रूसी रसायनज्ञ मेंडलीफ ने आवर्त्त नियम को प्रतिपादित किया था जो मेंडलीफ के आवर्त्त नियम के नाम से प्रसिद्ध है।

➡️मेंडलीफ की आवर्त सारणी को आवतों (Periods) तथा वर्गों (Groups) में बांटा गया है।

➡️तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं।

➡️क्षैतिज पस्तियों को आवर्त्त तथा ऊर्ध्वाधर स्तम्भों को वर्ग कहते हैं।

➡️लॉर्ड रेले और सर रेमसे ने उत्कृष्ट गैसों को स्थान देने के लिए आवर्स सारणी में कुछ सुधार किए थे।

➡️दीर्घ रूप सारणी में 18 ऊर्ध्वाधर स्तम्भ हैं। ये वर्ग या समूह कहलाते हैं।

➡️मॅडेलीफ के आवर्त सारणी में वर्ग VIII को छोड़कर सभी वर्ग उपवर्गों में विभाजित हैं।

➡️आवर्त सारणी की क्षैतिज पंक्तियाँ आवत कहलाती हैं। आवर्त सात है।

➡️उपवर्ग B तथा वर्ग VIII के तत्त्व संक्रमण तत्त्व कहलाते हैं।

➡️ शून्य वर्ग के तत्त्व अक्रिय (Noble) गैसें कहलाते हैं।

➡️किसी समूह में धात्विक गुण ऊपर से नीचे आने पर बढ़ता है।

➡️किसी समूह में ऊपर से नीचे आने पर आयनन ऊर्जा कम होती है।

➡️’17’ समूह में CI को छोड़कर किसी समूह में ऊपर से नीचे पर इलेक्ट्रॉन बधुता घटती है।

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