अब तो मेरी कलम भी रो पड़ी है, शहीदों की शहादत लिखते लिखते। 

बच्चे बच्चे के दिल में कोई अरमान निकलेगा, किसी के रहीम तो किसी के राम निकलेगा, मगर उनके दिल को चीर के देखा जाए, तो उसमें हमारा प्यारा हिन्दुस्तान निकलेगा। 

दोस्तों… एक सैनिक ने क्या खूब कहा है… किसी गजरे की खुशबू को महकता छोड़ आया हूँ, मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ, मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना… ऐ भारत माँ, मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ आया हूँ। 

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे 

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, अपने त दिल में है दोस्त, बस एक ही अरमान, एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान. 

कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं, हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिन्दुस्तान की शान का हैं. 

आजदी की कभी शाम नही होने देंगे, शहीदों की कुर्बानी बदनाम नही होने देंगे, बची हो जो इस बूँद भी गर्म लहू की, तब तक भारत के आंचल नेलाम नही होने देंगे. 

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं 

चाहता हूँ कोई नेक काम हो जाए, मेरी हर साँस देश के नाम हो जाए, 

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